2025: पूरी कहानी
तैयारी, फैसला, और आगे का मार्ग
“कोई राजनीतिक दल असली बदलाव नहीं चाहता, वरना पुरानी व्यवस्था आज भी क्यों टिकी होती? 2025 की पूरी कहानी इसी सच की गवाही है।”
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2025, एक मोड़
2025 हाजीपुर और बिहार के लिए एक मोड़ था, न कि मंज़िल और न अंत। उस वर्ष डॉ. आशुतोष सिंह ने फ्रांस की CNRS में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद से इस्तीफ़ा दिया। यह भारत, अमेरिका और यूरोप में बनाए करियर का एक सोचा समझा त्याग था, ताकि पूरी ऊर्जा हाजीपुर और बिहार को समर्पित हो सके।
2025 का निर्णय: त्याग और जन सुराज
2025 में डॉ. आशुतोष सिंह ने फ्रांस की CNRS में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद से इस्तीफ़ा दिया। यह भारत, अमेरिका और यूरोप में बनाए करियर का एक सोचा समझा त्याग था। उनकी योजना थी कि पूरी ऊर्जा हाजीपुर और बिहार को समर्पित करें, गलत नीतियों के खिलाफ़ खड़े हों, विदेश में देखे मानक लाएँ, और करियर राजनीति के बजाय वास्तविक विकल्प पेश करें।
उनका उद्देश्य कभी सत्ता या पद के लिए नहीं रहा। जब जन सुराज आया, उसने वादा किया कि मतदाताओं को योग्य विकल्प मिलेंगे, न कि पुरानी राजनीति की दोहराव। डॉ. सिंह का मानना था कि अगर कोई पूरे बिहार में बदलाव का दावा कर रहा है, तो हाजीपुर में खुद उतरकर उसका मौका छोटा करना उचित नहीं होगा। इसलिए उन्होंने 2025 की विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।
बाद में जब उम्मीदवारों का स्तर और इरादे वादे से मेल न खाए, और योग्यता की जगह पुरानी राजनीति फिर दिखी, तो अफ़सोस हुआ। पर उनका संकल्प वही है कि हाजीपुर के लिए वैज्ञानिक सोच, ईमानदारी और जमीनी काम लाया जाए।
जन सुराज, निष्पक्ष मौका
जन सुराज ने वादा किया था कि मतदाताओं को योग्य विकल्प मिलेंगे, न कि पुरानी राजनीति की दोहराव। डॉ. सिंह का मानना था कि अगर कोई पूरे बिहार में बदलाव का दावा कर रहा है, तो हाजीपुर में खुद उतरकर उसका मौका छोटा करना उचित नहीं होगा। इसलिए उन्होंने 2025 की विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, ताकि जन सुराज को निष्पक्ष मौका मिल सके।
2025 चुनाव, संदर्भ
2025 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए। उसी वर्ष डॉ. आशुतोष सिंह ने फ्रांस की CNRS में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद से इस्तीफ़ा देकर हाजीपुर और बिहार के लिए पूर्ण समर्पण की योजना बनाई थी। हाजीपुर में जन सुराज की ओर से प्रतिभा सिन्हा उम्मीदवार थीं, और भाजपा के अवधेश सिंह ने सीट जीती। डॉ. सिंह उम्मीदवार नहीं थे, क्योंकि उन्होंने जन सुराज को निष्पक्ष मौका देने का फैसला किया था।
आगे का मार्ग
चुनाव एक मोड़ था, मंज़िल नहीं। डॉ. सिंह का संकल्प वही है — हाजीपुर के लिए सोच, ईमानदारी और ज़मीन पर काम। विचार, टीम, और लोगों से मिलना, इसी रास्ते पर चलना है।
यहाँ वादों की जगह समाधान हैं, भाषण की जगह योजना, और एक नेता की जगह टीम।